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🕉️ बारह ज्योतिर्लिंग

12 ज्योतिर्लिंग — स्थान, कथा और विशेषता

भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग 'प्रकाश के स्तंभ' रूप में प्रकट हुए पवित्र स्थान माने जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार ये बारह हैं — इनके दर्शन और स्मरण से पापों का नाश होता है।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम् ।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये ॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥

1. सोमनाथ

स्थान : प्रभास पाटन, वेरावल (गिर सोमनाथ), गुजरात

विशेषता : अरब सागर का तट

कथा / महत्व : पहला ज्योतिर्लिंग। कथा है कि चन्द्रमा (सोम) को राजा दक्ष ने क्षय रोग का श्राप दिया था। चन्द्रमा ने यहाँ शिव की आराधना की और श्राप से मुक्ति पाई, इसलिए शिव यहाँ 'सोमनाथ' (चन्द्रमा के नाथ) कहलाए।

विशेष जानकारी : इस मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली में बना है और 1951 में इसकी प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

2. मल्लिकार्जुन

स्थान : श्रीशैलम, नल्लमला पहाड़ियाँ, कृष्णा नदी के तट पर, आंध्र प्रदेश

विशेषता : श्रीशैल पर्वत

कथा / महत्व : कथा के अनुसार पुत्र कार्तिकेय के रूठकर क्रौंच पर्वत पर चले जाने पर शिव-पार्वती उन्हें मनाने यहाँ आए। 'मल्लिका' (पार्वती) और 'अर्जुन' (शिव) के नाम से यह मल्लिकार्जुन कहलाया।

विशेष जानकारी : यह स्थान ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ 18 शक्तिपीठों में से एक (भ्रमराम्बा देवी) भी है — ऐसा दुर्लभ संगम अन्यत्र कम है।

3. महाकालेश्वर

स्थान : उज्जैन, शिप्रा नदी के तट पर, मध्य प्रदेश

विशेषता : प्राचीन अवन्तिका नगरी

कथा / महत्व : यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है और स्वयंभू माना जाता है। कथा है कि राजा चन्द्रसेन और बालक श्रीकर की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने दूषण नामक राक्षस का संहार कर नगर की रक्षा की।

विशेष जानकारी : यहाँ की प्रातःकालीन भस्म-आरती विश्वप्रसिद्ध है। उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ भी लगता है।

4. ओंकारेश्वर

स्थान : खंडवा जिले में नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर, मध्य प्रदेश

विशेषता : ॐ के आकार का द्वीप

कथा / महत्व : नर्मदा के बीच बना मांधाता (शिवपुरी) द्वीप ऊपर से देखने पर 'ॐ' के आकार का दिखता है। राजा मांधाता की तपस्या और देवताओं-दानवों के युद्ध की कथा से इस तीर्थ का सम्बन्ध है।

विशेष जानकारी : ओंकारेश्वर और उसके निकट ममलेश्वर (अमरेश्वर) — दोनों को मिलाकर एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहाँ नर्मदा परिक्रमा का भी विशेष महत्व है।

5. केदारनाथ

स्थान : रुद्रप्रयाग जिला, गढ़वाल हिमालय, उत्तराखंड (लगभग 3,583 मीटर की ऊँचाई)

विशेषता : मंदाकिनी नदी

कथा / महत्व : महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति के लिए शिव को खोजते आए। शिव बैल का रूप धरकर छिप गए; भीम ने उन्हें पहचाना और शिव भूमि में समाने लगे — उनकी पीठ का भाग यहाँ केदारनाथ में पूजित है। यह पंच केदार में पहला और चार धाम (छोटा चार धाम) में से एक है।

विशेष जानकारी : मंदिर प्रायः अप्रैल-मई (अक्षय तृतीया) से अक्टूबर-नवम्बर (भाई दूज) तक खुलता है। शीतकाल में बाबा की डोली ऊखीमठ ले जाई जाती है। यात्रा पैदल/घोड़ा/हेलीकॉप्टर से होती है।

6. भीमाशंकर

स्थान : खेड़ तालुका, पुणे जिला (सह्याद्रि पर्वत), महाराष्ट्र

विशेषता : भीमा नदी का उद्गम

कथा / महत्व : कथा के अनुसार शिव ने यहाँ त्रिपुरासुर (भीम नामक राक्षस) का वध किया। उनके पसीने से भीमा नदी निकली। घने जंगल में बसा यह स्थान भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य (शेकरू गिलहरी) के लिए भी प्रसिद्ध है।

विशेष जानकारी : भीमाशंकर के स्थान को लेकर परम्परा में मतभेद है — कुछ मान्यताएँ असम और उत्तराखंड के स्थानों को भी बताती हैं; महाराष्ट्र का यह मंदिर सर्वाधिक मान्य है।

7. काशी विश्वनाथ

स्थान : वाराणसी (काशी), गंगा नदी के तट पर, उत्तर प्रदेश

विशेषता : विश्वेश्वर / विश्वेश

कथा / महत्व : काशी को शिव की अपनी नगरी माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ प्राण त्यागने वाले को स्वयं शिव तारक मंत्र देकर मोक्ष प्रदान करते हैं। गंगा-स्नान के बाद विश्वनाथ दर्शन का विशेष महत्व है।

विशेष जानकारी : वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। 2021 में काशी विश्वनाथ धाम गलियारा (कॉरिडोर) का लोकार्पण हुआ।

8. त्र्यंबकेश्वर

स्थान : त्र्यंबक, नासिक जिला (ब्रह्मगिरि पर्वत के पास), महाराष्ट्र

विशेषता : गोदावरी नदी का उद्गम

कथा / महत्व : गौतम ऋषि की प्रार्थना पर शिव यहाँ प्रकट हुए और गोदावरी (गौतमी) नदी का उद्गम हुआ। यहाँ के लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों के प्रतीक तीन छोटे लिंग हैं, जो इसकी विशेषता है।

विशेष जानकारी : नासिक का सिंहस्थ कुंभ मेला त्र्यंबकेश्वर से जुड़ा है। यहाँ नारायण नागबलि, कालसर्प शांति जैसे विधान किए जाते हैं।

9. वैद्यनाथ

स्थान : देवघर (बैद्यनाथ धाम), संथाल परगना, झारखंड

विशेषता : चिताभूमि / हार्दपीठ

कथा / महत्व : कथा है कि रावण शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश से लिंग लाया था; मार्ग में देवताओं की युक्ति से लिंग यहीं स्थापित हो गया। शिव यहाँ रोग-हरता 'वैद्य' के रूप में पूजे जाते हैं। यह स्थान शक्तिपीठ भी है।

विशेष जानकारी : श्रावण मास में लाखों कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर यहाँ अर्पित करते हैं। कुछ परम्पराएँ परळी (महाराष्ट्र) और बैजनाथ (हिमाचल) को भी वैद्यनाथ मानती हैं; देवघर सर्वाधिक प्रसिद्ध है।

10. नागेश्वर

स्थान : द्वारका के निकट, दारुकावन क्षेत्र, गुजरात

विशेषता : नागों के ईश

कथा / महत्व : शिवभक्त सुप्रिय वैश्य को राक्षसी दारुका और दारुक ने बन्दी बना लिया था। सुप्रिय की भक्ति से शिव प्रकट हुए और राक्षसों का संहार किया। यहाँ का नाम 'नागेश' विषों-नागों से रक्षा करने वाले शिव को दर्शाता है।

विशेष जानकारी : मंदिर परिसर में शिव की विशाल प्रतिमा है। इस ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर भी परम्पराओं में मतभेद हैं (औंढा नागनाथ, जागेश्वर), पर द्वारका के पास का मंदिर सर्वाधिक मान्य है।

11. रामेश्वरम

स्थान : रामनाथपुरम जिला, पम्बन द्वीप, तमिलनाडु

विशेषता : सेतुबंध (धनुषकोडि के निकट)

कथा / महत्व : लंका पर चढ़ाई से पहले (या रावण-वध के बाद) श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर शिव की पूजा की। 'राम के ईश्वर' होने से यह रामेश्वर कहलाया। यह चार धाम में दक्षिण का धाम भी है।

विशेष जानकारी : मंदिर का तीसरा प्राकार (गलियारा) एशिया के सबसे लंबे गलियारों में गिना जाता है। मंदिर परिसर में 22 पवित्र कुंड (तीर्थ) हैं जिनमें स्नान की परम्परा है।

12. घृष्णेश्वर

स्थान : वेरुल (एलोरा गुफाओं के पास), छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र

विशेषता : बारहवाँ / अंतिम ज्योतिर्लिंग

कथा / महत्व : भक्तिन घुश्मा रोज़ 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर सरोवर में विसर्जित करती थी। शिव की कृपा से उसका मृत पुत्र जीवित हुआ और शिव यहाँ घुश्मेश्वर (घृष्णेश्वर) रूप में स्थापित हुए।

विशेष जानकारी : लाल पत्थर से बना यह मंदिर छोटा किन्तु सुंदर है; अहिल्याबाई होल्कर ने इसका पुनर्निर्माण कराया। यहाँ गर्भगृह में पुरुष बिना कमीज़/शर्ट के दर्शन करते हैं।