जैसलमेर में माहेश्वरियों की उत्पत्ति
जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूर लौद्रवा जैसलमेर की प्राचीन राजधानी है। यहां पर झाला मकवाणा राजपूत शाखा के कुशाग्र बुद्धि हमीरजी को मल माहेश्वरी की कन्या से विवाह करवा कर हमीर के वंशजों को माहेश्वरी बनाया गया तथा इनको अपने वंश में जब तक राज रहेगा तब तक इन्हीं के वंशजो को दीवान पद पर विभूषित रहने का परवाना लिख दिया गया।
हमीरजी का एक विवाह मल पुरूषोतम दासजी की कन्या राधा से हुआ। उनकी संतान महाजन माहेश्वरी 'टावरी' मेहता के नाम से प्रसिद्ध हुई। मल माहेश्वरियों के गुरू 'बिस्सा' (पुष्करणा ब्राह्मण) तथा देवी चामुण्डा थी। टावरी मेहता समाज के भी बिस्से (पुष्करणा) गुरू हुए।
हमीरजी ने खुईयाला खडीन में उस समय एक लाख रूपये की सूंठ व हल्दी पैदा की थी। इससे इस खडीन का नाम 'लाखीणा' पड़ा। हमीरजी का एक और विवाह गैलड़े सालगंथरजी की बेटी से हुआ।
हमीरजी के वंशज जैसलमेर, पोकरण, बीकानेर, पाली, आगरा, बृज, सहारनपुर, मालवा, खापरखेड़ा, नागपुर, मद्रास एवं कलकत्ता में रहते हैं।
माहेश्वरियों बारह न्यात
- महेश्वरी
- ओसवाल
- चित्रवाल
- श्रीमाल
- श्री श्रीमाल
- पोरवाल
- बघेरवाल
- पालीवाल
- पोकरा
- खरोड
- टीटोड़
- खण्डेलवाल
उक्त 12 शाखाओं को न्यात कहा जाता है। इन बारह न्यातों के अलावा अन्य भी कई महेसरी (माहेश्वरी) कहलाये। माहेश्वरियों की 84 खांप मानी गई है। अपने मूल पुरूषों व गांवों के नाम से ये शाखायें आज भी प्रसिद्ध है।
जैसलमेर नगर के 27½ पाड़े
जैसलमेर नगर में माहेश्वरियों के 27½ मोहल्ले थे। जिसे यहां पर पाड़ा कहा जाता है। ये निम्न है :-
- चाचो भूतड़ो पाड़ो
- बीसाणी पाड़ो
- झागरो (डांगरों) पाड़ो
- नहारो पाड़ो
- मोकाती पाड़ो
- धीरण पाड़ो
- पंसारी पाड़ो
- गोविंदाणी पाड़ो
- माली पाड़ो
- केलो पाड़ो
- भइयो पाड़ो
- खावडी पाड़ो
- मुखियो पाड़ो
- विहाणी (विजांणी) पाड़ो
- जाल पाड़ो
- गंघण पाड़ो
- आधो पाड़ो
- जैठो पाड़ो
- जोसीजी पाड़ो
- मुहतो पाड़ो
- रेलण पाड़ो
- चांडको पाड़ो
- चांदी पाड़ो
- महादेव पाड़ो
- आसणी पाड़ो
- मोहतो पाड़ो
- सुरजण पाड़ो
इन स्थानों का नाम आज भी माहेश्वरियों के खांपों के नामों से प्रसिद्ध है तथा कई मोहल्लों में उनके घर हैं तथा कुलदेवियों के मन्दिर बने हैं तथा उनके गुरूओं के घर भी उन मोहल्लों में हैं।
माहेश्वरियों के नख
- भूतड़ा चाचा
- भूतड़ा
- बठड़ बीकानेरिया
- जावंधर
- धीरन
- वीसानी
- मसूदा
- डांगरा नाहर
- चांडक जसेरा
- काबा, हरडू के वंशज मुंधड़ा नागौरी
- भजा राठी कोठारी नबीरा
- मालपानी
- कचोलिया
- डागा गोलकिया
- डागा पंसारी
- नबीरा
- राठी गुंगावालां
- रा. वापेचा
- रा. बगड़ा
- रा. दलाल
- रा. गेरिया, लधड़जी, जावंधिया हरदतरा, बठड़ मसानिया, टावरी कुलधरिया